ना चाहते हुए भी अफगानिस्तान में तालिबान का मददगार बना व्हाट्सएप

फेसबुक जहां अमरीकी कानूनों के तहत तालिबान को आतंकी संगठन मानकर अपने फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि प्लेटफार्मो का तो उसे प्रयोग नहीं करने दिया पर वॉट्सएप का अपने हक में इस्तेमाल करने से वह उसे नहीं रोक सका।

अब मीडिया में इस तरह की खबरें आ रही हैं कि काबुल को फतह करने के बाद तालिबान ने ना सिर्फ संदेश भेजकर अफगानियों का समर्थन मांगा बल्कि उनसे यह भी आग्रह किया कि कहीं भी लूटपाट या लड़ाकों को कुछ गलत करते देखें तो उसकी वॉट्सएप पर ही शिकायत करें।

अब कई पत्रकार इस तरह के संदेशों को शेयर करते हुए सामने आ रहे हैं।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वाट्सएप पूरी तरह इंक्रिप्टेड है यानी दो लोगों के बीच संदेश के होने वाले आदान प्रदान को व्हाट्सएप भी नहीं पढ़ सकता और जब पढ़ ही नहीं सकता तो रोकेगा कैसे।


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